Friday, September 4, 2015

बस यूँ ही!

बस यूँ ही थोडा बहुत लिखा करते हैं।
हाल ए दिल बयां किया करते हैं।

हाल-ए-दिल बयां करना भी जरुरी हैं।
इस जीवन को चलाने के लिये, लिखना भी जरुरी हैं।

अगर न लिखें तो जीवन अधूरा लगता है।
लिखें तो जैसे कोई सपना पूरा लगता है।

सपने न देखो तो आगे न बढ़ पाओगे।
जिंदगी की दौड़ में पीछे छूट जाओगे।

बस यूँ ही थोडा बहुत लिखा करते हैं।
हाल ए दिल बयां किया करते हैं।

- © निशान्त पन्त

प्रेम!

प्रेम!

प्रेम क्या है?
एक एहसास है।
मन का विश्वास है।
पाक और साफ़ है।
ह्रदय में जगी एक आस है।
प्रेम एक चिंगारी है
जो दिल में दबी रहती है
और जीने की चाह बढ़ाती है।

-- © निशान्त पन्त "निशु"

Wednesday, September 2, 2015

जल ही जीवन है।

जल ही जीवन है।

छम-छम छम-छम करके देखो
कैसे बारिश होती है।
टप-टप टप-टप करके देखो
कैसे बारिश होती है।

घोर अँधेरे मेघों को देखो
कैसे नभ में छा जाते हैं।
कैसे छुप कर इन बदरा में
सूर्यदेव इतराते हैं।

हो सवार इन काली घटा पर
इंद्रदेव मुसुकाते हैं।
जल ही जीवन है
यह बात सब को बतलाते हैं।

--
© निशान्त पन्त "निशु"

Thursday, July 23, 2015

शायरी

तलाश जिंदगी की पूरी होगी।
उसे देखकर गुमान भी होगा।
विश्वास रखो अपनी मुहब्बत पर।
एक न एक दिन वो तेरी बाँहो में होगी।

--निशान्त पन्त "निशु"

Friday, April 17, 2015

पर कश्मीर को हासिल करना, औकात नहीं है 'पाक' की।

धरती के इस पाक स्वर्ग पर,
नापाक नजर है पाक की।
पर कश्मीर को हासिल करना,
औकात नहीं है 'पाक' की।

चाहे कितने षड़यंत्र रचा लें,
इन पाक परस्तों के आका।
हिंदुस्तानी सेना के आगे,
ना मिल पायेगा इनको मौका।

लाख जतन कर लें ये चाहे,
इनको असफल ही है होना।
क्यूंकि कश्मीर की धरती की रक्षा को
तैनात है हिंदुस्तानी सैनिक तान कर अपना सीना।

देशभक्ति से ऒत प्रोत,
देश का हर एक सैनिक है।
देश की खातिर जान लुटाने
का सपना मन में काबिज़ है।

नापाक इरादे मन में रखकर,
यहाँ "पाक" घुसपैठ करता है।
पर हिंदुस्तानी फौजों के आगे,
हर आतंकी जान गंवाता है।

जय हो हिन्द की सेना की जिसने,
भारत का मान बढाया है।
आतंकियों के नापाक इरादों,
को जिसने मिटटी में मिलाया है।
लेकर हाथ में अपना तिरंगा,
देश का परचम लहराया है।


-- © निशान्त पन्त

Saturday, March 14, 2015

तलाश

जिंदगी की तलाश में,
गुज़रते हैं दिन मेरे।
तलाश है कि पूरी होती नहीं।
समय सीमा समाप्त होती नहीं।
ह्रदय की वेदना कम होती नहीं।

कब ज्ञान होगा जीवन के मूलाधार का!
कब उस परम ब्रह्म की प्राप्ति होगी!
इसी सोच में चल रहा है जीवन।
कभी तो दिवा स्वप्न से निकलकर,
परम सत्य की प्राप्ति होगी।

ना जाने ये तलाश कब पूरी होगी!
कब नए जीवन की शुरुवात होगी!
कब होगा जीवन में अंधकार का खात्मा!
कब खुशियों भरी सुनहरी सुबह होगी!


---© निशान्त पन्त 'निशु'

Monday, March 9, 2015

ख्वाब

शायर नहीं हूँ मैं लेकिन,
शायरी लिखने का ख्वाब रखता हूँ।
आशिक नहीं हूँ मैं लेकिन,
आशिकी करने का ख्वाब रखता हूँ।

दीवाना नहीं हूँ मैं लेकिन,
दिल्लगी करने की तमन्ना रखता हूँ।
कोई दिल में नहीं है लेकिन,
दिल देने की तमन्ना रखता हूँ।

कांटे है इश्क की राह में बेशुमार,
फिर भी नंगे पैर चलने की चाहत रखता हूँ।
दिल में जो ख्वाब अधूरा है,
उसे पूरा करने का ख्वाब देखता हूँ।


---© निशान्त पन्त