Sunday, February 11, 2018

"मैंने जीना सीख लिया"

हृदय पटल पर सुंदर स्मृति,
फिर सजीव हो जाती है।
जब तस्वीर तुम्हारी,
सामने आ जाती है।

हो उठता है व्याकुल हृदय,
अश्रु धार बह जाती है।
जब जब इस हृदय में,
याद तुम्हारी आ जाती है।

आशाओं का वृक्षारोपण,
करके जीना सीख लिया।
तुम को यादों में रख कर,
मैंने जीना सीख लिया।

न तेरा दोष है,
न मेरा दोष है।
दोषी तो केवल परिस्थिति,
जिस कारण से वियोग हुआ।

आशाओं का वृक्षारोपण,
करके जीना सीख लिया।
तुम को यादों में रख कर,
मैंने जीना सीख लिया।

- © निशान्त पन्त "निशु"

Sunday, January 28, 2018

कल्पना

सुबह तुम्हारा अंगड़ाई लेना,
फिर मुझसे गले लग जाना।
नर्म होठों से अपने,
मेरे हृदय को छू जाना,
बड़ा अच्छा लगता है।

तुम्हारा अधरों से अपने,
मेरे अधरों को छू लेना,
बड़ा अच्छा लगता है।

तुम्हारी गर्म सांसो का,
मेरे चेहरे को छू जाना,
बड़ा अच्छा लगता है।

बाहों में बाहें डाल कर,
साथ बैठे रहना,
बड़ा अच्छा लगता है।

काश तुम अभी मेरे पास होती,
यह कल्पना करना ही,
बड़ा अच्छा लगता है।

- © निशान्त पन्त "निशु"

Sunday, September 3, 2017

सुकून ऐ इश्क़

सुकून ऐ इश्क होता है नसीब, नसीब वालों को।
वरना इश्क तो हर इंसा किया करता है।

-© निशान्त पन्त "निशु"

Monday, June 26, 2017

तुम

दिल में तुम हो,
दिमाग में तुम हो,
मेरी धड़कन भी तुम हो,
मेरी प्यास भी तुम हो,
मेरी भूख भी तुम हो।

मेरी सुबह भी तुम हो,
मेरी शाम भी तुम हो,
मेरा दिन भी तुम हो,
मेरी रात भी तुम हो।

मेरा सब कुछ तुम हो,
मेरा हर पल तुम हो,
मेरा चैन भी तुम हो,
दिल का करार भी तुम हो।

दिल में तुम हो,
दिमाग में तुम हो,
मेरी धड़कन भी तुम हो।


-© निशान्त पन्त "निशु"

Sunday, March 12, 2017

#उत्तराखंड_देवभूमि_चुनाव_नतीजे_२०१७ पर मेरा व्यंग्य बाण

चले बाघ, बकरी चराने
जिनकी थी सबको चाहत
देशवासियों उस युगपुरुष को
सब कहते थे हरीश रावत।

बेकार हुआ सब दावँ पेच,
जब जनता ने मतदान किया।
नतीजा जब निकला चुनाव का,
सबका घमंड, छिन्न-भिन्न हुआ।

दावँ पेच के बड़े खिलाड़ी,
थे जोड़ तोड़ के बाहुबली।
जनता ने जब दम्भ भरा,
चहुँओर मच गयी खलबली।

जन-जन के हित रखे ताक पर,
न दिया कभी किसी को सम्मान।
जनता ने जब मतदान किया,
तब टूट गया सबका अभिमान।


-निशान्त पन्त 'निशु'

#यूपी_चुनाव_२०१७_रिजल्ट पर मेरा एक व्यंग्य बाण....

आओ टीपू हरिद्वार,
ओढ़ लो सन्यासी चोला।
अब न सहेंगे समाजवादी अत्याचार,
यूपी का हर इंसां बोला।

काम बोलता था सपा का,
होते थे दुराचार और अत्याचार।
जब आया मौसम वोटों का,
जनता ने चलाया वोट बाण।

माया की बेटी हैं माया,
माया से इनको प्रेम है।
जनता ने सबक सिखलाया,
दे भाजपा को वोटों की भेंट सप्रेम है।

केसरिया रंग से रंगा,
आज हमारा यूपी है।
हाथ भी हो गया केसरिया,
हो गयी सबकी ऐसी-तैसी है।

-निशान्त पन्त "निशु"

Sunday, December 4, 2016

जय हो हिन्द की सेना

रक्तरंजित हो चला है,
धरती का यह स्वर्ग।
पाकिओं की साजिश है,
जिनका होगा बेड़ा गर्क।
सेना हरदम तैयार है,
खोदने को इनकी कब्र।

देश नहीं झुकने देंगे,
जब तक अंतिम सांस है।
यही देश के सैनिक से,
जन-जन की आस है।

चाहे कितना षडयंत्र रचा ले,
ये पाक परस्ती भिखमंगे।
पर देश के हर सैनिक के आगे,
ये अपनी जान की भीख मांगे।

देश का सैनिक देश के खातिर,
जब भी हथियार उठाता है।
उसका एक एक वार,
दुश्मन का सीना छलनी करता है।

जय हो हिन्द की सेना,
जो देश की रक्षा करती है।
देश की खातिर जो,
जीवन का बलिदान करती है।"

-© निशान्त पन्त "निशु"