Thursday, July 23, 2015

शायरी

तलाश जिंदगी की पूरी होगी।
उसे देखकर गुमान भी होगा।
विश्वास रखो अपनी मुहब्बत पर।
एक न एक दिन वो तेरी बाँहो में होगी।

--निशान्त पन्त "निशु"

Friday, April 17, 2015

पर कश्मीर को हासिल करना, औकात नहीं है 'पाक' की।

धरती के इस पाक स्वर्ग पर,
नापाक नजर है पाक की।
पर कश्मीर को हासिल करना,
औकात नहीं है 'पाक' की।

चाहे कितने षड़यंत्र रचा लें,
इन पाक परस्तों के आका।
हिंदुस्तानी सेना के आगे,
ना मिल पायेगा इनको मौका।

लाख जतन कर लें ये चाहे,
इनको असफल ही है होना।
क्यूंकि कश्मीर की धरती की रक्षा को
तैनात है हिंदुस्तानी सैनिक तान कर अपना सीना।

देशभक्ति से ऒत प्रोत,
देश का हर एक सैनिक है।
देश की खातिर जान लुटाने
का सपना मन में काबिज़ है।

नापाक इरादे मन में रखकर,
यहाँ "पाक" घुसपैठ करता है।
पर हिंदुस्तानी फौजों के आगे,
हर आतंकी जान गंवाता है।

जय हो हिन्द की सेना की जिसने,
भारत का मान बढाया है।
आतंकियों के नापाक इरादों,
को जिसने मिटटी में मिलाया है।
लेकर हाथ में अपना तिरंगा,
देश का परचम लहराया है।


-- © निशान्त पन्त

Saturday, March 14, 2015

तलाश

जिंदगी की तलाश में,
गुज़रते हैं दिन मेरे।
तलाश है कि पूरी होती नहीं।
समय सीमा समाप्त होती नहीं।
ह्रदय की वेदना कम होती नहीं।

कब ज्ञान होगा जीवन के मूलाधार का!
कब उस परम ब्रह्म की प्राप्ति होगी!
इसी सोच में चल रहा है जीवन।
कभी तो दिवा स्वप्न से निकलकर,
परम सत्य की प्राप्ति होगी।

ना जाने ये तलाश कब पूरी होगी!
कब नए जीवन की शुरुवात होगी!
कब होगा जीवन में अंधकार का खात्मा!
कब खुशियों भरी सुनहरी सुबह होगी!


---© निशान्त पन्त 'निशु'

Monday, March 9, 2015

ख्वाब

शायर नहीं हूँ मैं लेकिन,
शायरी लिखने का ख्वाब रखता हूँ।
आशिक नहीं हूँ मैं लेकिन,
आशिकी करने का ख्वाब रखता हूँ।

दीवाना नहीं हूँ मैं लेकिन,
दिल्लगी करने की तमन्ना रखता हूँ।
कोई दिल में नहीं है लेकिन,
दिल देने की तमन्ना रखता हूँ।

कांटे है इश्क की राह में बेशुमार,
फिर भी नंगे पैर चलने की चाहत रखता हूँ।
दिल में जो ख्वाब अधूरा है,
उसे पूरा करने का ख्वाब देखता हूँ।


---© निशान्त पन्त

Sunday, March 8, 2015

तस्वीर

तस्वीर तेरी देख कर,
दिन गुजरे याद आ जाते हैं।
प्यार के पल और मस्ती,
के फ़साने याद आ जाते हैं।

रहते थे तेरी जुल्फों घने साये में,
वो घने साये याद आ जाते हैं।
तस्वीर तेरी देख कर,
दिन गुजरे याद आ जाते हैं।

घूमते थे जब बाँहों में बाँह डाले हुए,
वो ख़ुशी के पल याद आ जाते हैं।
तस्वीर तेरी देख कर,
दिन गुजरे याद आ जाते हैं।

कंधे पर मेरे रख कर सर अपना,
जब तुम साथ चला करती थीं।
दिन वो सुहाने याद आते हैं।

रख कर मेरे सीने पर सर अपना,
जब तुम धडकनें महसूस करती थीं।
पल वो दीवाने याद आते हैं।

तस्वीर तेरी देख कर,
दिन गुजरे याद आ जाते हैं।
प्यार के पल और मस्ती,
के फ़साने याद आ जाते हैं।


--© निशान्त पन्त

Saturday, February 21, 2015

मूक दर्शक

कोई मस्ताना कहता है,
कोई परवाना कहता है।
मेरे दिल की गहराई में झांको,
तेरा चेहरा झलकता है।

तू मुझसे चली गयी,
मेरे दिल को अखरता है।
तू मुझसे दूर है लेकिन,
दिल के करीब लगती है।

मैं तेरे प्यार में पागल,
तू मेरे प्यार की दीवानी।
ये तेरा दिल समझता है,
या मेरा दिल समझता है।

इस दुनिया को तेरा मेरा,
रिश्ता बेमाना लगता है।
हमारे रिश्ते की पवित्रता को,
केवल खुदा समझता है।

ये दुनिया वाले लोग हैं,
केवल वही चार लोग।
जिनका नाम ले ले कर,
रिश्तेदार उलाहना देते हैं।
कि तुमने किया गलत कुछ भी,
बोल बोल कर हमारी जान ले लेंगे।

ना बोले पलट कर कुछ भी,
तब भी यही प्रक्रिया होगी।
नहीं तो भरी महफ़िल में,
द्रोपदी सी चीर हरण होगी।

इन सबसे बचना है तो,
बुलंद अपनी आवाज करो।
नहीं तो मूक दर्शक से,
तालियाँ बजाओ तुम।


© निशान्त पन्त "निशु"

Thursday, February 19, 2015

बनावटी दुनिया

पक्षियों का कलरव,
पानी की कलकल
फूलों की सुगंध
सब कुछ खो गया
कंकरीट के जंगल में।

मशीनी मानव,
इंसान रुपी दानव,
अबलाओं की चीखें,
मानवता का ह्रास,
इस बनावटी दुनिया में।

सब सुविधाएं इस दुनिया में,
नहीं है तो केवल-
मानसिक शांति,
आपसी प्रेम, आत्मीयता एवं बंधुत्व,
इस बनावटी दुनिया में।


© निशान्त पन्त "निशु"