Thursday, January 21, 2016

आईना

आईना हूँ, सच ही दिखाता हूँ।
इंसान नहीं, जो फितरत बदल लूँ।

-- निशान्त पन्त "निशु"

Wednesday, November 4, 2015

तथाकथित असहिष्णुता - व्यंग्य

राजनीति से प्रेरित होकर असहिष्णुता को मुद्दा बनाकर पुरुस्कार वापस करने वाले तथाकथित लेखकों, साहित्यकारों, नेताओं, अभिनेताओं व अन्य पर एक व्यंग्यात्मक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ संभवतः मेरी अन्य कविताओं की भातिं ही आप इसे पसंद करेंगे।

तथाकथित असहिष्णुता - व्यंग्य

सोचो उन पर क्या बीती है,
पीछे पच्चीस सालों में।
दूर हुए वो जन्मभूमि से,
भटके दर दर सालों में।

तब कहाँ थे ये नेता-अभिनेता
जब लूटी गयी अस्मत अबलाओं की।
तब कहाँ थे ये साहित्यकार,
जब हुए थे 'उन' पर अत्याचार।

मूक बधिर से बैठे थे तब,
ये तथाकथित से माननीय।
तब असहिष्णुता कहाँ गयी थी,
जब हत्या हुई थी लाखों की।

राजनीति से प्रेरित हैं,
कपटी कुटिल ये माननीय।
देश की साख बिगाड़ने को,
आतुर हैं ये माननीय।

कैसे बैठे हो तुम
अपने घर में सुकून से।
जब कश्मीरी पंडित हैं,
दूर अपने कुटुंब से।

बाज़ नहीं आते हो तुम,
अपने कुटिल विचारों से।
करते हो राजनीति तुम,
मासूमों की लाशों पे।

-- © निशान्त पन्त "निशु"


Sunday, September 13, 2015

हिंदी - राष्ट्र भाषा

देश का मान है हिंदी।
देश का सम्मान है हिंदी।
देश की शान है हिंदी।
देश की पहचान है हिंदी।

हर दिल की जान है हिंदी।
शब्दों की पहचान है हिंदी।
विचारों का प्रवाह है हिंदी।
लबों पर मुस्कान है हिंदी।

'भारतेंदु' की सोच है हिंदी।
'प्रेमचंद' की कल्पना है हिंदी।
'निराला' की कविता है हिंदी।
'पंत' की भावना है हिंदी।

देश की शान है हिंदी।
देश की पहचान है हिंदी।
भारत माँ का मुकुट है हिंदी।
भारत माँ के माथे की बिंदी है हिंदी।


-- © निशान्त पन्त "निशु"

Friday, September 4, 2015

बस यूँ ही!

बस यूँ ही थोडा बहुत लिखा करते हैं।
हाल ए दिल बयां किया करते हैं।

हाल-ए-दिल बयां करना भी जरुरी हैं।
इस जीवन को चलाने के लिये, लिखना भी जरुरी हैं।

अगर न लिखें तो जीवन अधूरा लगता है।
लिखें तो जैसे कोई सपना पूरा लगता है।

सपने न देखो तो आगे न बढ़ पाओगे।
जिंदगी की दौड़ में पीछे छूट जाओगे।

बस यूँ ही थोडा बहुत लिखा करते हैं।
हाल ए दिल बयां किया करते हैं।

- © निशान्त पन्त

प्रेम!

प्रेम!

प्रेम क्या है?
एक एहसास है।
मन का विश्वास है।
पाक और साफ़ है।
ह्रदय में जगी एक आस है।
प्रेम एक चिंगारी है
जो दिल में दबी रहती है
और जीने की चाह बढ़ाती है।

-- © निशान्त पन्त "निशु"

Wednesday, September 2, 2015

जल ही जीवन है।

जल ही जीवन है।

छम-छम छम-छम करके देखो
कैसे बारिश होती है।
टप-टप टप-टप करके देखो
कैसे बारिश होती है।

घोर अँधेरे मेघों को देखो
कैसे नभ में छा जाते हैं।
कैसे छुप कर इन बदरा में
सूर्यदेव इतराते हैं।

हो सवार इन काली घटा पर
इंद्रदेव मुसुकाते हैं।
जल ही जीवन है
यह बात सब को बतलाते हैं।

--
© निशान्त पन्त "निशु"

Thursday, July 23, 2015

शायरी

तलाश जिंदगी की पूरी होगी।
उसे देखकर गुमान भी होगा।
विश्वास रखो अपनी मुहब्बत पर।
एक न एक दिन वो तेरी बाँहो में होगी।

--निशान्त पन्त "निशु"